Erectile Dysfunction (नपुंसकता) के कारण क्या है? इसके पीछे के शारीरिक और मानसिक कारण
Written by Dr. Srishti Rastogi
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August 5, 2025
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संक्षेप
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे तनाव, डायबिटीज़, हार्मोनल बदलाव, खराब लाइफस्टाइल या दवाइयों का असर। सही इलाज और जीवनशैली सुधार से इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। कुछ मामलों में यह स्थायी रूप से भी ठीक हो सकता है। घरेलू उपाय, टेस्ट और डॉक्टर की सलाह से इसकी पहचान और इलाज संभव है। उम्र कोई भी हो- 20s, 30s या 50s – ये परेशानी आम है, लेकिन इसका हल भी मौजूद है।
अगर आप ये पढ़ रहे हैं, तो शायद आपको महसूस हुआ है कि अब आपके लिए पहले जैसा इरेक्शन आना या बनाए रखना आसान नहीं रहा। ये बात थोड़ी चिंता वाली हो सकती है लेकिन आपके जैसे बहुत लोग हैं जो इस समस्या से जूझ रहे हैं। इरेक्टाइल डिसफंक्शन सिर्फ सेक्स से जुड़ी परेशानी नहीं है, ये आपकी सेहत का भी इशारा हो सकता है। थकान या तनाव से कभी-कभार ऐसा होना नार्मल है, लेकिन जब ये बार-बार हो, तो इसकी वजह जानना ज़रूरी है। इस लेख में हम जानेंगे कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कारण क्या हो सकते हैं, जैसे शारीरिक बीमारियां, मानसिक तनाव या आपकी जीवनशैली से जुड़ी आदतें। सही जानकारी और समझ से इस परेशानी का हल निकाला जा सकता है।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के शारीरिक कारण (Physical Causes of ED)
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कई मामलों में शरीर के अंदरूनी सिस्टम जैसे रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन), नर्व सिस्टम या हार्मोनल असंतुलन बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। ये शारीरिक कारण किसी गंभीर बीमारी, चोट या उम्र बढ़ने के साथ भी हो सकते हैं।’
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ब्लड फ्लो की समस्या (Blood Flow Problems)
लिंग में इरेक्शन के लिए वहां भरपूर मात्रा में खून का पहुंचना जरूरी होता है। अगर रक्त धमनियों (आर्टरीज) में रुकावट (जैसे एथेरोस्क्लेरोसिस) या हाई बीपी की वजह से खून का बहाव सही तरीके से नहीं हो पाता, तो लिंग में तनाव नहीं आता या बना नहीं रहता [1]।
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डायबिटीज (Diabetes)
अगर आपकी शुगर लम्बे समय से कंट्रोल में नहीं है, तो इससे नसों और खून की नलिकाओं को नुकसान पहुँच सकता है, जिसकी वजह से इरेक्शन में कठिनाई आती है। साथ ही डायबिटिक न्यूरोपैथी (नर्व डैमेज) भी एक आम वजह है [2]।
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कोलेस्ट्रॉल और मोटापा (High Cholesterol & Obesity)
शरीर में अधिक फैट और खराब कोलेस्ट्रॉल जमा होने से खून की नलिकाएं संकरी हो जाती हैं। इससे खून का बहाव प्रभावित होता है और यह इरेक्शन को कमजोर कर सकता है [3]।
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हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance)
शरीर में टेस्टोस्टेरोन जैसे सेक्स हार्मोन की कमी होने पर भी यौन इच्छा (libido) कम हो जाती है। थायरॉयड हार्मोन का असंतुलन भी इस पर असर डाल सकता है और दोनों इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कारण बनने में बड़ी भूमिका निभाते हैं [4]।
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न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स (Nerve-related Conditions)
स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या स्ट्रोक जैसी बीमारियां नर्व सिस्टम को प्रभावित करती हैं, जिससे दिमाग लिंग तक अपने सन्देश अच्छे से नहीं पहुंचा पाता [5]।
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पेल्विक सर्जरी या चोट (Pelvic Surgery or Trauma)
प्रोस्टेट या ब्लैडर कैंसर की सर्जरी, या पेल्विक एरिया में चोट लगने से वहां की नसों और ब्लड सप्लाई को नुकसान हो सकता है, जिससे इरेक्टाइल फंक्शन पर सीधा असर पड़ता है।
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दवाओं के साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Medications)
ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, हार्ट प्रॉब्लम्स या कैंसर की कुछ दवाएं इरेक्शन में रुकावट डाल सकती हैं। इनमें एंटीडिप्रेसेंट्स, डाइयूरेटिक्स, एंटीहिस्टामिन्स, कीमोथैरेपी, और कुछ दर्द निवारक दवाएं (painkillers) शामिल हैं।
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शराब, स्मोकिंग और नशे की लत (Alcohol, Smoking, and Substance Abuse)
इनका लंबे समय तक सेवन नसों और ब्लड सर्कुलेशन को नुकसान पहुंचाता है। ये नर्व सिस्टम को दबा देते हैं, जिससे इरेक्शन में कमजोरी आती है [6]।
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फास्ट फूड और हाई फैट डाइट (Fast Food/High Fat Diet)
बर्गर, पिज्जा, चीज़, मक्खन जैसी चीज़ें कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती हैं और नसों को ब्लॉक कर देती हैं, जिससे इरेक्शन पाने में कठिनाई हो सकती है [7]।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के मानसिक कारण (Psychological Causes of ED)
कई बार नपुंसकता के कारण सिर्फ शारीरिक नहीं होते, बल्कि हमारा मन, भावनात्मक स्थिति या मानसिक तनाव भी इसका कारण हो सकता है। रिसर्च के अनुसार, करीब 10%–20% इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) की वजहें पूरी तरह से मानसिक या मनोवैज्ञानिक होती हैं। अब बात करते हैं उन कारणों की:
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तनाव (Stress)
जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो उसका असर सिर्फ मन पर नहीं, आपकी सेक्शुअल हेल्थ पर भी पड़ता है। ऐसे में दिमाग सेक्स से जुड़ी इच्छा और उत्तेजना को कंट्रोल करने वाले हार्मोन को ठीक से रिलीज़ नहीं कर पाता, जिससे इरेक्शन में परेशानी आने लगती है [8]।
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एंग्जायटी या प्रदर्शन की चिंता (Performance Anxiety)
अगर किसी पुरुष को पहले कभी सेक्स के दौरान लिंग में पर्याप्त इरेक्शन न आया हो, तो अगली बार भी ऐसा होने का डर दिमाग में घर कर जाता है। इसे ही ‘performance anxiety’ कहा जाता है। यह डर इतना हावी हो सकता है कि शरीर भले तैयार हो, लेकिन मन की घबराहट इरेक्शन होने ही नहीं देती [9]।
बहुत से पुरुष सोचते हैं कि ED सिर्फ उम्र बढ़ने की वजह से होता है, लेकिन सच यह है कि सही लाइफस्टाइल और इलाज से हर उम्र में अच्छा यौन स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है।
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अपराधबोध (Guilt)
कुछ पुरुषों को लगता है कि वे अपने पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पा रहे, चाहे वो उनकी खुद की अपेक्षा हो या साथी की। यह अपराधबोध धीरे-धीरे उनके आत्मविश्वास को कम कर देता है और नपुंसकता की वजह बन सकता है।
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अकेलापन या भावनात्मक दूरी (Loneliness/Emotional Disconnect)
अगर आप अपने पार्टनर से इमोशनली जुड़ा हुआ महसूस नहीं करते, तो यौन उत्तेजना अपने आप ही कम हो जाती है।
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खराब सेक्शुअल एक्सपीरियंस (Past Sexual Trauma or Bad Experiences)
कभी-कभी बचपन में हुई घटनाएं या कोई खराब सेक्स के अनुभव मन में बैठ जाते हैं और बाद में फिजिकल होने के समय तनाव या डर पैदा कर सकते हैं [10]।
Allo asks
क्या आपने कभी इरेक्टाइल डिसफंक्शन (लिंग में कमजोरी) का अनुभव किया है?
निष्कर्ष
इरेक्टाइल डिसफंक्शन का मुख्य कारण क्या है? इसका जवाब नहीं दिया जा सकता, क्योंकि हर पुरुष की स्थिति अलग होती है। किसी के लिए यह सिर्फ तनाव की वजह से हो सकता है, तो किसी और के लिए यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। अगर आप लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। यह सिर्फ एक यौन समस्या नहीं, बल्कि आपकी पूरी हेल्थ की ओर इशारा है। इसलिए सही समय पर डॉक्टर से सलाह लें, शारीरिक जांच कराएं और ज़रूरत हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ED किस उम्र में शुरू होता है?
ED किसी भी उम्र में हो सकता है। हालांकि 40 की उम्र के बाद इसकी संभावना बढ़ जाती है। आजकल 20s और 30s में भी कमजोर इरेक्शन की शिकायत आम होती जा रही है।
क्या Viagra से ED ठीक हो सकता है?
Viagra और ऐसी दवाएं (जैसे Sildenafil, Tadalafil) ब्लड फ्लो बढ़ाकर अस्थायी रूप से इरेक्शन में मदद करती हैं। लेकिन ये स्थायी इलाज नहीं हैं।
ED कितने समय तक रहता है?
ये पूरी तरह से इसकी वजह पर निर्भर करता है। अगर कारण मानसिक है, तो काउंसलिंग से जल्दी सुधार आ सकता है। शारीरिक कारणों में समय ज़्यादा लग सकता है।
क्या ED का इलाज हमेशा के लिए संभव है?
अगर कारण शारीरिक या मानसिक रूप से इलाज योग्य है, तो सही इलाज और जीवनशैली बदलाव से ED को काफी हद तक या पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
पुरुष Viagra लेना कब शुरू करते हैं?
आमतौर पर 40 की उम्र के बाद लोग Viagra जैसी दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।
Sources
- 1.
Atherosclerosis is associated with erectile function and lower urinary tract symptoms, especially nocturia, in middle-aged men
- 2.
Erectile dysfunction and diabetes: A melting pot of circumstances and treatments
- 3.
Association of BMI with erectile dysfunction: A cross-sectional study of men from an andrology clinic
- 4.
High prevalence of erectile dysfunction in men with hyperthyroidism: a meta-analysis
- 5.
Erectile Dysfunction in Individuals with Neurologic Disability: A Hospital-based Cross-sectional Study
- 6.
Smoking and erectile dysfunction: findings from a representative sample of Australian men
- 7.
Association of Diet With Erectile Dysfunction Among Men in the Health Professionals Follow-up Study
- 8.
Stress management and erectile dysfunction: a pilot comparative study
- 9.
Sexual Performance Anxiety
- 10.
Impact of Childhood Sexual Assault on Sexual Function in the Czech Male Population