Erectile Dysfunction / Acupressure Points For Erectile Dysfunction In Hindi

Erectile Dysfunction में Acupressure: पॉइंट्स, फायदे और सही तरीका

Written by Dr. Srishti Rastogi
December 15, 2025
Erectile Dysfunction में Acupressure: पॉइंट्स, फायदे और सही तरीका

अक्सर जब पुरुष इरेक्शन से जुड़ी परेशानी महसूस करते हैं, तो उनके मन में दवाइयाँ, सप्लिमेंट या घरेलू नुस्खे ही आते हैं। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि शरीर के कुछ खास बिंदुओं पर हल्का दबाव डालकर भी सेक्सुअल फंक्शन में सुधार लाया जा सकता है? इरेक्शन की समस्या सिर्फ शरीर की नहीं होती। इसके पीछे तनाव, थकान, कम ज़ोर वाली नसें, हार्मोन का असंतुलन और कमज़ोर रक्तसंचार जैसी कई वजहें होती हैं। एक्यूप्रेशर इन्हीं गहरी वजहों पर काम करता है। यह एक शांत, प्राकृतिक और शरीर को संतुलित करने वाली विधि है, जहाँ हाथों की उँगलियाँ ही इलाज का साधन बन जाती हैं। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि एक्यूप्रेशर असल में क्या होता है, यह कैसे काम करता है, नपुंसकता में कैसे राहत देता है, और किन बिंदुओं को दबाने से फर्क महसूस हो सकता है।

एक्यूप्रेशर होता क्या है?

एक्यूप्रेशर एक पारंपरिक चीनी तकनीक है जिसमें शरीर के खास बिंदुओं पर हल्का या मध्यम दबाव लगाया जाता है। माना जाता है कि हमारे शरीर में ऊर्जा (ची) कई चैनलों से होकर गुजरती है। जब यह ऊर्जा रुक जाती है या असंतुलित हो जाती है, तब शरीर में समस्याएँ पैदा होती हैं, जैसे थकान, तनाव, और यौन शक्ति में कमी। जब इन बिंदुओं पर सही तरीके से दबाव दिया जाता है, तो शरीर के अंदर कई अच्छे बदलाव हो सकते हैं, जैसे:

  • तनाव कम होता है
  • नसें ज्यादा एक्टिव होती हैं
  • ब्लड फ्लो बेहतर होता है
  • शरीर रिलैक्स होता है
  • मन शांत होता है

यही कारण है कि बहुत से लोग इसे घर पर ही अपने रूटीन का हिस्सा बनाते हैं।

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क्या आपने कभी इरेक्शन सुधारने के लिए एक्यूप्रेशर, योग या लाइफस्टाइल बदलाव आज़माया है?

एक्यूप्रेशर ED में कैसे मदद कर सकता है?

ED एक अकेले कारण से नहीं होता। ब्लड फ्लो, तनाव, कम ऊर्जा, नींद, हार्मोन और रूटीन, सब अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। एक्यूप्रेशर इन सभी हिस्सों को अलग-अलग तरीकों से सपोर्ट कर सकता है।[1]

  • ब्लड फ्लो बढ़ाने में मदद: कई एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पेट, कमर और पैरों में होते हैं। इन पर दबाव देने से शरीर की मुख्य नसों में बेहतर रक्त प्रवाह होता है, जिससे इरेक्शन पाने में सहायता मिल सकती है।
  • तनाव और चिंता कम करना: परफॉर्मेंस एंग्ज़ायटी, रिलेशनशिप स्ट्रेस और ओवरथिंकिंग, ये ED को और खराब कर देते हैं। कुछ एक्यूप्रेशर पॉइंट्स सीधे-सीधे मन को शांत करने, हार्मोन संतुलित करने और तनाव कम करने में मदद करते हैं।
  • नसों को सक्रिय करना: एक्यूप्रेशर का दबाव कुछ नर्वस पाथवे को एक्टिव करता है जो यौन संवेदनाओं, उत्तेजना और इरेक्शन में भूमिका निभाते हैं।
  • शरीर की ऊर्जा बढ़ाना: अगर थकान, कमजोरी या कम ऊर्जा आपके यौन स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, तो निचले पेट और पैरों के पॉइंट्स ऊर्जा और vitality को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

ऊपरी शरीर के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स: इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ED) में मदद करने वाले पॉइंट्स 

  पॉइंट का नाम

  कहाँ स्थित है?

कैसे मदद करता है?

    कैसे दबाएँ?

        HT7

कलाई की रेखा पर, छोटी उँगली की तरफ

चिंता और तनाव कम करता है, मन शांत करता है

30–60 सेकंड हल्का दबाव

        PC6

कलाई की बीच की नसों के थोड़ा ऊपर, हथेली की तरफ

तनाव, घबराहट और    बेचैनी कम करता है

अंगूठे से 1 मिनट दबाएँ

      GV20

सिर के बीचोंबीच, दोनों कानों की लाइन मिलाने पर

मन को शांत करता है, मानसिक तनाव कम

हल्की गोल मालिश 1 मिनट

      BL23 

रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर, कमर के पास

यौन ऊर्जा और स्टैमिना बढ़ाता है

हल्का दबाव या गुनगुना सेक

निचले शरीर के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स जो ED में मदद कर सकते हैं 

  पॉइंट का नाम

  कहाँ स्थित है?

कैसे मदद करता है?

      कैसे दबाएँ?

    CV6 (चीहाई)

नाभि से 2 उँगली नीचे

ऊर्जा बढ़ाता है, थकान कम करता है

1–2 मिनट हल्का दबाव

  CV4 (ग्वानयुआन)

नाभि और जघनास्थि के बीच, प्यूबिक बोन से 2 उँगली ऊपर

प्रजनन शक्ति और ब्लड फ्लो में सुधार

2 मिनट हल्की मालिश

        SP6

टखने की अंदर वाली हड्डी से 4 उँगली ऊपर

ब्लड फ्लो बढ़ाता है, हार्मोन संतुलन

    1–2 मिनट दबाव

        LR3

पैर के ऊपर, बड़े और दूसरी उँगली के बीच

तनाव कम करता है और उत्तेजना बढ़ाता है

  1 मिनट हल्का दबाव

        ST36

घुटने के नीचे, पिंडली की बाहरी तरफ

stamina और ऊर्जा बढ़ाता है

    1–2 मिनट दबाएँ

        KD3

टखने की भीतरी हड्डी और एड़ी के बीच का गड्ढा

  किडनी-ऊर्जा,   stamina, vitality

      1 मिनट दबाएँ

        KI1

पैर के तलवे का बीच वाला हिस्सा

तनाव कम, ऊर्जा बढ़ाता है

  अंगूठे से 1 मिनट दबाएँ

ED के लिए एक्यूप्रेशर कैसे करें?

  • किसी शांत और आरामदायक जगह बैठें या लेटें।
  • एक बार में सिर्फ 2–3 एक्यूप्रेशर पॉइंट चुनकर शुरू करें।
  • हर पॉइंट को लगभग 1 मिनट हल्के, स्थिर दबाव से दबाएँ।
  • दबाव इतना रखें कि सिर्फ गर्माहट महसूस हो, तेज़ दर्द नहीं।
  • बेहतर असर के लिए रोज़ 5–10 मिनट करें और 2–3 हफ्तों तक नियमित रखें।

क्या एक्यूप्रेशर अकेले नपुंसकता (ED) का इलाज कर सकता है?

एक्यूप्रेशर कई लोगों को आराम और सुधार देता है, लेकिन यह हर तरह की नपुंसकता का पूरा इलाज नहीं है। अगर समस्या शुगर, ब्लड प्रेशर, हार्मोन असंतुलन, नसों की समस्या या चोट के कारण है, तो केवल एक्यूप्रेशर से पूरा इलाज संभव नहीं होता। फिर भी, इसकी एक बड़ी खासियत है कि यह उन कारणों को काफी कम कर देता है जो इरेक्शन को और कमजोर बनाते हैं, जैसे:

  • तनाव
  • थकान
  • शरीर में जकड़न
  • मानसिक दबाव
  • कमज़ोर ब्लड फ्लो 

जब ये कारण कम होते हैं, तो शरीर अपना संतुलन बेहतर तरीके से वापस पाता है और इरेक्शन में भी सुधार दिखता है। यानी एक्यूप्रेशर मुख्य इलाज नहीं, लेकिन बहुत असरदार सहायक तरीका है।[2]

अगर आपकी ED बहुत गंभीर मेडिकल कारण से नहीं है, तो एक्यूप्रेशर जैसी प्राकृतिक तकनीकें दवा के साथ मिलकर अच्छे सपोर्ट की तरह काम कर सकती हैं।

किसे एक्यूप्रेशर करते समय सावधानी रखनी चाहिए?

एक्यूप्रेशर आमतौर पर सुरक्षित है, लेकिन कुछ स्थितियों में थोड़ा सतर्क रहना जरूरी है:

  • बहुत तेज़ या अनियंत्रित ब्लड प्रेशर
  • पेट या कूल्हे में हर्निया
  • हाल में हुआ बड़ा ऑपरेशन
  • कमर, पैर या पेट की गंभीर चोट
  • नसों से जुड़ी पुरानी समस्या

इन स्थितियों में एक्यूप्रेशर शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

निष्कर्ष

एक्यूप्रेशर उन चीज़ों को संतुलित करता है जो इरेक्शन पर सबसे ज़्यादा असर डालती हैं, जैसे - तनाव, जकड़न, कम ब्लड फ्लो और मानसिक दबाव। अगर ED किसी गहरी मेडिकल समस्या से जुड़ा है, तो केवल एक्यूप्रेशर काफी नहीं होगा, लेकिन दवा और अच्छी लाइफस्टाइल के साथ मिलकर यह बेहद असरदार सपोर्ट बन जाता है। नियमित रूप से करने पर कई पुरुष बेहतर नींद, कम तनाव और इरेक्शन क्वालिटी में हल्का सुधार महसूस करते हैं। यानी, एक्यूप्रेशर मुख्य इलाज नहीं, लेकिन एक सुरक्षित और भरोसेमंद मदद ज़रूर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक्यूप्रेशर से ED में सुधार दिखने में कितना समय लगता है?

एक्यूप्रेशर का असर तुरंत दवा की तरह नहीं होता। अगर इसे रोज़ाना सही तरीके से किया जाए, तो 2–3 हफ्तों में तनाव कम होने, शरीर रिलैक्स होने और इरेक्शन क्वालिटी में हल्का सुधार महसूस हो सकता है। असर व्यक्ति की उम्र, लाइफस्टाइल और ED के कारण पर निर्भर करता है।

क्या एक्यूप्रेशर को रोज़ करना सुरक्षित है?

हाँ, सही और हल्के दबाव के साथ एक्यूप्रेशर रोज़ किया जा सकता है। इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता। बस ध्यान रखें कि बहुत तेज़ दबाव न डालें और दर्द होने पर तुरंत रोक दें।

क्या एक्यूप्रेशर करने से कोई साइड इफेक्ट हो सकता है?

सही तरीके से करने पर आमतौर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। लेकिन गलत पॉइंट, बहुत ज़्यादा दबाव या चोट वाली जगह पर करने से हल्की दर्द या बेचैनी हो सकती है। इसलिए शुरुआत में धीरे-धीरे करना बेहतर रहता है।

क्या एक्यूप्रेशर दवाओं के साथ किया जा सकता है?

हाँ, एक्यूप्रेशर को ED की दवाओं या अन्य इलाज के साथ safely किया जा सकता है। यह इलाज को रिप्लेस नहीं करता, बल्कि तनाव कम करके और ब्लड फ्लो सपोर्ट करके इलाज के असर को बेहतर बना सकता है।

क्या उम्र बढ़ने के साथ एक्यूप्रेशर का असर कम हो जाता है?

उम्र के साथ शरीर की रिकवरी धीमी हो सकती है, लेकिन एक्यूप्रेशर फिर भी फायदेमंद रहता है। खासकर 35–50 साल के पुरुषों में यह तनाव, थकान और ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी ED में अच्छा सपोर्ट देता है।